抽屉底层,有我爸的烈士证。

    不是原件。

    是复印件。

    复印件旁边,夹着一份特招申请表。

    “省公安厅政治部特殊人才引进计划”。

    申请人那一栏,不是我的名字。

    是一个叫陈念的女人。

    我看向申请表最下方。

    推荐人签字栏,是周衍的笔迹。

    我的丈夫。

    1.

    我把那份申请表拿出来,手有点抖。

    不是害怕。

    是一种说不清的直觉。

    申请表很正式。盖了章。左上角有编号。

    编号格式我认识。

    我在区档案馆工作过两年,见过教育局的内部文件。

    这是真实提交过的材料。

    不是草稿,不是模板。

    是走完流程、盖过公章的正式文件。

    我翻到第二页。

    “申请人基本信息”一栏。

    姓名:陈念。

    性别:女。

    出生年月:1995年3月。

    和我同年。

    再往下。

    “特招依据”一栏,打了勾的是:

    ?? 烈士子女。

    我的心跳漏了一拍。

    烈士子女。

    我爸沈卫国,2005年在抗洪抢险中牺牲。

    追认烈士。

    那年我九岁。

    我妈在我十二岁那年改嫁,去了外地。

    从那以后,我就是一个人。

    烈士证是我爸留给我的唯一的东西。

    我把它锁在老房子的铁皮柜里。

    从没给任何人看过。

    除了周衍。

    结婚第一年,他说想帮我把烈属补贴的手续理一理。

    我把原件给了他。

    他说他办好了,把原件还给了我。

    我没多想。

    现在看着这张复印件,我开始想了。

    他复印了我爸的烈士证。

    然后用在了一个叫陈念的女人身上。

    我拿出手机,拍了照。

    申请表每一页,正反面。

    复印件也拍了。

    然后原样放回抽屉。

    把锁扣好。

    我坐在书房的椅子上,看着窗外。

    天已经黑了。

    周衍还没回来。

    他最近经常加班。

    以前我觉得他辛苦。

    现在我想知道,他加的是什么班。

    我打开电脑,进了省政务公开网。

    搜索“省公安厅特殊人才引进”。

    找到了三年前的公示名单。

    第七个名字。

    陈念。

    特招依据:烈士子女。

    审批编号和抽屉里那份申请表的编号,一模一样。

    我点开编号旁边的链接。

    经办人工号。

    我输入查询。

    经办人姓名:周衍。

    单位:市教育局人事科。

    门锁响了。

    周衍回来了。

    “还没睡?”

    他换鞋的声音很轻。

    “在看东西。”

    我关掉网页。

    “什么东西?”

    “工作的。”

    他走过来,亲了一下我额头。

    “早点休息。”

    我看着他的背影。

    他走进卧室。

    门关上了。

    我重新打开电脑。

    在搜索栏输入:

    陈念。

    2.

    陈念这个名字,我在周衍的生活里从没听过。

    他的手机从不设密码。

    至少他让我以为是这样。

    第二天,周衍去上班后,我进了他的书房。

    这次不是翻抽屉。

    是开电脑。

    他的电脑密码我知道。

    登录后,我打开相册文件夹。

    没有可疑照片。

    我打开回收站。

    也是空的。

    我换了个思路。

    打开微信电脑端的备份目录。

    文件很多。

    我按日期排序。

    在最早的备份文件夹里,找到了一个隐藏文件夹。

    名字是一串数字。

    点开。

    照片。

    一个女人。

    长头发,瘦,笑起来有酒窝。

    不是自拍。

    是周衍的拍摄视角。

    餐厅、公园、电影院、图书馆。

    照片很多。

    最早的一张,日期是七年前。

    我和周衍结婚三年。

    也就是说,这些照片拍摄于我们结婚前两年。

    其中一张,女人穿着学士服。

    胸前的校徽我认识。

    和周衍同一所大学。

    我关掉文件夹。

    没有删除。

    没有声张。

    我拿出手机,拍了文件路径和照片数量的截图。